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निबंध संग्रह

नवपाषाण काल में जब पहिए का आविष्कार हुआ तब मनुष्य का जीवन पहिए की गति से आगे बढ़ने लगा । पहिए से छकड़ा गाड़ी का विकास हुआ, जिससे कम समय में वस्तुओं को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान हो गया। सन् 1812 में मैक मिलन ने साईकिल का अविष्कार किया जो आज भी सड़को पर दिखती है। डीजल इंजन तथा पेट्रोल इंजन के विकास के उपरांत विन्भिन्न प्रकार के दो पहिया मोटरसाइकिल , तीपहिया एवं चार पहिया वाहन जैसे टेम्पू, टैक्टर, कार, जीप, बस इत्यादि वाहनो का विकास हुआ। वायुयान और रेलगाड़ियो के विकास से वस्तुओ का बड़े पैमाने पर आयात-निर्यात किया जाने लगा। जिससे विकास में कई गुना वृद्धि हुआ। साथ ही बड़े पैमाने पर तेजी से सड़को का विकास हुआ।

विकास दर विकास की इस श्रंखला में नियमो की अनदेखी हुई और बहुत पुराने वाहन ज्यादा प्रदुषण करते रहे, सड़को पर क्षमता से ज्यादा वाहन चलने से प्रदुषण में भरपुर इजाफा हुआ। प्रदुषण से पर्यावरण के साथ-साथ, आम जन-जीवन प्रभावित हुआ है। प्रदुषण का मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग जैसा संकट उतपन्न हुआ है, अब समय है कि इनसे होने वाले नुकसान को कम किया जाय। जिससे ग्लोबल वार्मिंग में कमी आये साथ ही ऐसा उपाय भी करना होगा जिससे आम जन-जीवन प्रभावित नही हो। इसलिए इन वाहनो पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाना नियमानुकुल नही लगता, हाँ इसके जगह पर ज्यादा प्रदुषण पैदा करने वाले वाहनो पर पूर्णतः प्रतिबंध लगना शुरु हो गया है साथ ही इनके विकल्प जैसे ई-रिक्शा, ई-कार, ई-स्कूटर इत्यादि पर ट्रायल और टेस्टिंग भी किया जा रहा है। कुछ जगहो पर ये मार्केट में उपलब्ध भी है ये ई-वाहन ही इलेक्ट्रिक वाहन कहलाते है।

इलेक्ट्रिक वाहन का मतलब उन वाहनो से है जो विद्युत उर्जा पर कार्य करे। विद्युत उर्जा को बैटरी में संरक्षित किया जा सकता है। इसका मतलब बैटरी युक्त वाहन या बैटरी से चलने वाली गाड़ियाँ इलेक्ट्रिक वाहन होती है। आजकल बहुत सारी कंपनियाँ इलेक्ट्रिक वाहनो को पूर्ण रूप से विकसित करने पर अपना ध्यान केन्द्रित करने में लगी हुई है। क्योकि उन्हे पता है कि भविष्य में इन्ही वाहनो से आवागमन संभव हो सकेगा क्योकिं पेट्रोल और डीजल उर्जा के परम्परागत स्त्रोत है और ये आने वाले समय में बिल्कूल सीमित हो जायेंगे और इनका उपयोग किफायती नही होगा।

इलेक्ट्रिक वाहन के उपयोग के कई फायदे भी है जैसे पर्यावरण स्वच्छ रह सकेगा, भविष्य में इस तरह के अन्य अविष्कारो को प्रेरणा और प्रोत्साहन भी मिलेगा। लोग इन वाहनो का ज्यादा उपयोग कर इसे बनाने वाली कंपनियो को लाभान्वित भी करेंगे, ध्वनि प्रदुषण में कमी होगी क्योकिं डीजल और पेट्रोल चलित वाहनो के इंजन ज्यादा आवाज करते है। इलेक्ट्रिक वाहन अपेक्षाकृत काफी हल्के होते है जिससे बहुत कम संसाधन का उपयोग होगा और कचड़ा के प्रबंधन में सुलभता होगी। इलेक्ट्रिक वाहनो के मरम्मत पर भी काफी कम खर्च आता है। इलेक्ट्रिक वाहनो के उपयोग को बढ़ाने के लिए भारत सरकार द्वारा भी कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाये गये है जैसेः- ई-अमृत योजना के तहत भारतीय उत्पादक को सब्सिडी उपलब्ध कराना, इलेक्ट्रिक वाहन को ई.एम.आई पर भी लिया जा सकता है। राज्यो के द्वारा विभिन्न दर पर वाहन खरीदारको को सब्सिडी उपलब्ध कराना इत्यादी।

इलेक्ट्रिक वाहन डीजल एवं पेट्रोल इंजनो वाले वाहनो के मुकाबले कम क्षमता वाला है। इसे बार-बार चार्ज करने की जरूरत होती है। एक बार में ज्यादा दूरी तय करना मुश्किल माना जाता है मौसम के बदलाव का भी इसपर असर पड़ता है। अभी इसमें अनुसंधान कार्य चल ही रहा है। इलेक्ट्रक वाहन आज के समय की जरूरत है पर्यावरण को स्वच्छ रखना अत्यंत महत्वपूर्ण होता जा रहा है। पर्यावरण से समझौता करना भविष्य की पीढ़ी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। वाहन का सदुपयोग निश्चित होना आवश्यक है। एक दायरा निश्चित कर उस दायरे से ज्यादा प्रदुषण करने वाले वाहनो में या तो सुधार कर सही कर देना चाहिए या पूर्णतः प्रतिबंधित कर देना चाहिए। इलेक्ट्रिक वाहन के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए तथा नए अनुसंधान पर अत्यधिक जोर देना चाहिए जिससे भविष्य में इसका विकल्प तैयार किया जा सके।

भ्रष्टाचार संस्कृत भाषा के दो शब्द “भ्रष्ट” और “आचार” से मिलकर बना है। भ्रष्ट का अर्थ होता है - नीच गिरा हुआ पतित जिसने अपने कर्तव्य को छोड़ दिया है तथा -आचार शब्द का अर्थ होता है - आचरण, चरित्र, चाल-चलन, व्यवहार आदि। अतएव भ्रष्टाचार का अर्थ है - गिरा आचरण या चरित्र और भ्रष्टाचारी का अर्थ है- ऐसा व्यक्ति जिसने अपने कर्तव्य की अवहेलना करके निजी स्वार्थ के लिए कुछ कार्य किए है, जिनकी उससे अपेक्षा नही थी। आजकल स्वतंत्र भारत में यह शब्द प्राय नेताओ, जमाखोरो, चोरबाजारियों , मुनाफाखोरों आदि के लिए ज्यादा प्रयोग किया जाता है । अंग्रेजी के “करप्शन“ (Corruption) को ही हिन्दी में भ्रष्टाचार कहा जाता है तथा नई सभ्यता एवं भोगवादी मनोवृति को भ्रष्टाचार की जननी माना जाता है ।

भ्रष्टाचार अनेक प्रकार का होता है तथा इसके करने वाले भी अलग-अलग तरीके से भ्रष्टाचारी करते है। जैसे, आप किसी किराने वाले को लीजिए, जो पिसा धनिया या हल्दी बेचता है । वह धनिया में घोड़े की लीद तथा हल्दी में मुल्तानी मिट्टी मिलाकर अपना मुनाफा बढ़ाता है और लोगो को जहर खिलाता है। यह मिलावट का काम भ्रष्टाचार है। दूध में आजकल यूरिया और डिटर्जेन्ट पाउडर मिलाने की बात सामने आने लगी है, यह भी भ्रष्टाचार है। बिहार में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए है। यूरिया आयात घोटाला भी एक भ्रष्टाचार के रूप में सामने आया है। केन्द्र के कुछ मंत्रियो के काले -कारनामें चर्चा का विषय बने हुए है। सत्ता के मोह ने बेशर्मी ओढ़ रखी है। लोगो ने राजनीति पकड़ कर ऐसे पद हथिया लिए है, जिन पर कभी इस देश के महान नेता सरदार बल्लभभाई पटेल, श्री रफी अहमद किदवई, पं. गोविन्द बल्लभ पंत जैसे लोग सुशोभित हुए थे। आज त्याग, जनसेवा, परोपकार, लोकहित तथा देशभक्ति के नाम पर नही, वरन् लोग आत्महित, जातिहित, स्ववर्गहित र सब से ज्यादा समाज विरोधी तत्वो का हित करके नेतागण अपनी कुर्सी के पाए मजबूत कर रहे है। उत्तर प्रदेश में कुर्सी की होड़ तथा एक विशेष जाति को फायदा पहुचाने की जो रिपोर्ट सामने आई है उससे प्रत्येक सुसंस्कृत देशवासी का सिर शर्म से झुक जाता है। इस देश में भ्रष्टाचार की आंधी आई हुई है, जिसमें मंत्री से लेकर संतरी तक अपनी जेबें भरने में लगे हुए है।

भ्रष्टाचार को आप कैन्सर का रोग कह सकते है, जिस प्रकार कैन्सर रोग शरीर की तंत्र प्रणाली को जकड़ कर मनुष्य को निर्जीव कर देता है , ठीक उसी प्रकार भ्रष्टाचार हमारे देश की अर्थव्यवस्था को पंगू बना रहा है। शायद ही कोई ऐसा विभाग तथा व्यक्ति बाकी बचा हो जो भाष्टाचार में शामिल न हो। गांव में लेखपाल अथवा पटवारी तक यह करते सुने जाते है कि जब हमारे नेता पैसा लेते है, तो हम पैसा क्यो न लें। इस भ्रष्टाचार से सराबोर व्यवस्थित को सदाचार की ओर ले जाने का साहस करना आकाश से तारे तोड़ कर लाने जैसा असंभव बन गया है।

लोकतंत्र अथवा जनता के राज में भारत इस हद तक भ्रषटाचार के मकड़जाल में फंस जाएगा, इसकी कल्पना शायद गांधीजी ने कभी न की होगी। स्वतंत्रता के अभी आठ दशक भी नही बीते किन्तु हम उन अत्याचारो को भूल गए है, जो इस देश मे मुगलो तथा अंग्रेजो शासको द्वारा किए गये थे। आज कुर्सी की भूख ने हमें अंधा बनाया हुआ है । हम भ्रष्ट होकर अपने दायित्व देशहित तथा भावी पीढ़ी के कल्याण की उपेक्षा कर रहे है। देश चाहे धरातल में चला जाए आज हमें विल्कुल चिन्ता नही है। प्रतिभाओ का पलायन हो रहा है तथा बड़े-बड़े वैज्ञानिक, इंजीनियरो, डाँक्टरो आदि की उपेक्षा करके वोट बैंक बनाने को प्रमुखता दी जा रही है। कुछ दिनो से सैनिको की खराब स्थिति ओर उनकी नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव करके स्थिति को सुधारने का दावा किया जा रहा है परन्तु वास्तविक स्थिति कुछ और ही मालूम पड़ता है। पड़ोसी देशो की रक्षा बजट में बढ़ोतरी भी देश के लिए चिन्ता का विषय है। मनुष्यो में राजनेता बड़ी भयावह हस्ती होता है, वह कब क्या कर डाले नहीं कहा जा सकता। राजनेता जब व्यवसायिक राजनीति करने लगता है तो उसकी आखों में स्वार्थ बस जाता है । वह हर काम में अपना हित ढूढ़ता है तथा उसके लिए भ्रष्ट या निषिद्ध जो भी काम उसे करना पड़े जरूर करता है। एक का रोग दूसरे पर चढ़ने लगने लगता है और इस प्रकार सारी राजनीति सिद्धांतो की नहीं, अपितु भ्रष्टाचार की राजनीति बन जाती है । शिक्षा, स्वास्थ्य लोक निर्माण, लोक कल्याण, सुरक्षा, खाद्य, जलापूर्ति, बिजली, कृषि और न जाने कितने बिभाग है , जहा कहीं न कही कोई न कोई गोलमाल जरूर है। ऐसी स्थिति में अब पुनः चिन्तन की जरूरत है ताकि भावी पीढ़ी देश को सही दिशा दे सके। भ्रष्टाचार करने की नोबत तब आती है, जब मनुष्य अपनी लालसाएं इतनी ज्यादा बढ़ा लेता है कि उनको पूरा करने की कोशिशो में उसे भ्रष्टाचार की शरण लेनी पड़ती है । बूढ़े-खूसट राजनीतिज्ञ भी यह नही सोचते कि उन्होने तो भरपूर जीवन जी लिया है, कुछ ऐसा काम किया जाए जिससे सारी दुनिया में उनका नाम उनके मरने के बाद भी अमर रहै। रफी साहब की खाद्यनीति को आज भी लोग याद करते है । उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री के रूप में उनका किया गया कार्य 60 वर्ष बीतने के बाद भी किसान गौरव के साथ याद करते है । आज भ्रष्टाचार के मोतियाबिन्द से हमें अच्छाई नजर नही आ रही। इसीलिए सोचना जरूरी है कि भ्रष्टाचार को कैसे मिटाया जाए।

इसके लिए निम्नलिखित उपाय काफी सहायक सिद्ध हो सकते हैः

(क) लोकपालो को प्रत्येक राज्य, केन्द्रशासित प्रदेश तथा केन्द्र में नियुक्त करके।

(ख) निर्वाचन व्यवस्था को और भी आसान तथा कम खर्चीला बनाया जाए ताकि समाज तथा लोक कल्याण से जुड़े लोग भी चुनावो में भाग ले सके।

(ग) भ्रष्टाचार का अपराधी चाहे कोई भी हो, उसे कठोर से कठोर दण्ड दिया जाए।

आज भ्रष्टाचारियो को महिमामण्डित करने तथा उन्हे ऊचे से ऊचे पद पर प्रतिष्ठित करने का रिवाज चल पड़ा है तथा लोग जातिवादी प्रभाव के कारण ऐसे लोगो का सामाजिक बहिष्कार करने के बजाय उन्हे वोट देकर ऊंचे आसन पर प्रतिष्ठित करके उनकी पूजा करते है। यह स्थिति सोचनीय है। न्यायपालिका तो अपना काम करेगी ही, किन्तु समाज को भी अपने दायित्व का बैध होना चाहिए तथा भ्रष्टाचारियो के खिलाफ जनाक्रोश प्रकट करने में उसे तनिक भी संकोच नही करना चाहिए चाहे कोई भी कितना बड़ा नेता क्यो नही हो। सामाजिक बहिष्कार कानून से भी ज्यादा प्रभावकारी होता है। ऐसे लोगो के खिलाफ जगहृ-जगह प्रदर्शन तथा आन्दोलन किए जाने चाहिए, ताकि भ्रष्टाचारियों को पता चले कि उनके काले कारनामें दुनिया जान चुकी है और जनता उनसे नफरत करती है। हमारे देश का कितना बड़ा दुर्भाग्य है कि जहां चाणक्य जैसे प्रतिनिधि झोपड़ी में रहकर चन्द्रगुप्त का साम्राज्य चलाते थे, वाल्मिकी जैसे ऋषि वन में रहकर भगवान राम के पुत्रो को शिक्षा देते थे। तथा आदि महाकाव्य रामायण की रचना करते थे, आज उन्ही के प्रतिनिधि वातानुकुलित डिब्बो में यात्रा करते है, वातानुकुलित घरो में रहते है और उनके भ्रष्टाचार की हद यह है कि वे पशुओ का चारा तथा मुर्गियो का दाना तक हजम कर जाते है।

समय अवश्य करवट बदलता है । न्यायपालिका तो अपने कर्तव्य का पालन करती ही है, यदि इसी प्रकार कार्यपालिका भी दबावो और बन्धनो से मुक्त होकर काम करने लगे तो भ्रष्टाचार रूपी दानव-समाप्ति की संभावना काफी बढ़ जाएगा।

पृथ्वी सभी मनुष्यों की जरूरतो को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है, लेकिन लालच पूरी करने के लिए नही । - महात्मा गाँधी प्राचीन समय से वर्तमान समय तक इंसान के रहन-सहन, सामाजिक व्यवस्था, वैज्ञानिक और औद्योगिक सोच में काफी बदलाव हुआ है। बड़े उद्योगो के विकसित होने से काम आसान होने से साथ ही इसमे समय की बचत भी हुई है। परंतु इस बात से भी इनकार नही किया जा सकता की हमारे पर्यावरण मे जिस प्रकार से बदलाव हो रहे है और पर्यावरण जिस तरह से असंतुलित हो रहा है, वायुमंडल में उष्मा का प्रभाव जिस तरह से बढ़ रहा है सामान्य जन-जीवन को प्रभावित कर रहा है। यह एक वैश्विक समस्या बन चुका है। हालांकि समस्त देश इस समस्या से निजात पाने के लिए कुछ ना कुछ प्रयास कर रहे है। सुर्य की किरणे जब हमारे वायुमंडल में प्रवेश करती है तो इसमे से निकलने वाली उष्मा को पृथ्वी के द्वारा सोख लिया जाता है जिससे वायुमंडल गर्म होता रहता है, जिससे वायुमंडल में कार्बनडाइ आक्साइड का स्तर बढ़ रहा है। जब वायुमंडल में कार्बनडाइ आक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है तो वायुमंडल का ताप बढ़ जाता है। वायुमंडल में उष्मा में लगातार हो रही वृद्धि भूमंडलीय उष्मीकरण या ग्लोबल वार्मिंग कहलाता है। ग्रीनहाऊसगैस( कार्बनडाइआँक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन, क्लोरिन और ब्रोमाइन इत्यादि रसायनिक यौगिक सभी वातावरण में मिल कर रेडियोएक्टिव विकिरण के संतुलन को नुकसान पहुँचाते है, ये गर्म विकिरण को सोखने की क्षमता रखते है जिसकी वजह से धरती गर्म होने लगती है। प्रदुषण, जनसंख्या वृद्धि, ओद्योगिकरण, जंगलो की कटाई, ओजोन परत मे का घटना, उर्वरक और कीटनाशक का अधिक प्रयोग भूमंडलीय उष्मीकरण के मुख्य कारण है। भूमंडलीय उष्मीकरण के रोकथाम के लिए हमे व्यापक स्तर पर अभियान चलाना चाहिए। लोगो को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करना चाहिए। इसके प्रभाव और रोकथाम के उपाय की जानकारी सभी को होनी चाहिए। ज्यादा मात्रा में धुआ देने वाली गाड़ियो, पुरानी गाड़ियो को बैन कर देना चाहिए। साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनो के उपयोग पर बल देना चाहिए। उद्योगो से निकलने वाली हानिकारक गैसो के सामाधान पर जोड़ देकर, क्लोरोफ्लोरोकार्बन के उपयोग को पूर्णतः बंद कर और अधिक मात्रा मे पेड़ लगाकर भूमंडलीय उष्मीकरण को कम किया जा सकता है। भूमंडलीय उष्मीकरण मनुष्य की कृति है। किसी नई वस्तु के विकसित होने पर लोगो में उस नई तकनीक को अपनाने की होड़ लगी रहती है परंतु उससे होने वाले नुकसान की तरफ कोई देखना तक नही चाहता है। यही कारण है कि जहरीले पदार्थ हमारे पर्यावरण में तेजी से फैल रहे है और हमे इन हानिकारक पदार्थो से छुटकारा पाने के लिए अभी से ही सख्त नियम बनाकर उनका पूरी तरह अनुपालन करना सुनिश्चित करना चाहिए। जिससे भविष्य में हमें ऐसी मुसीबतो का सामन ही नही करना पड़ेगा। बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर का कहना है की- व्यवस्था और कानून राजनीति के शरीर रूप की दवाइयां है और जब शरीर बीमार पड़ जाए तो दवाओ को अपना काम करना चाहिए। महिला सशक्तिकरण पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा कहा गया मशहूर वाक्य – लोगो को जगाने के लिए महिलाओ का जागृत होना जरूरी है। एक बार जब वो अपना कदम उठा लेती है, परिवार आगे बढ़ता है, गांव आगे बढ़ता है, और राष्ट्र विकास की ओर उन्मुख होता है। भारत मे महिलाओ को सशक्त बनाने के लिए सबसे पहले समाज में उनके अधिकारो और मूल्यो को मारने वालो उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरूरी है जैसे दहेज प्रथा, अशिक्षा यौन हिंसा, असमानता , भ्रूण हत्या, महिलाओ के प्रति घरेलू हिंसा, बलात्कार, वैश्यावृति, मानव तस्करी और ऐसे ही दूसरे विषय। लैंगिक भेदभाव राष्ट्र में सास्कृतिक सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक अंतर ले आता है जो देश को पीछे की ओर ढकेलता है। भारत के संविधान में उल्लिखित समानता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए महिलाओ को सशक् बनाना सबसे प्रभावशाली उपाय है इस तरह की बुराइयो को मिटाने के लिए। लैगिंक समानता को प्राथमिकता देने से पूरे भारत में महिला सशक्तिकरण के उच्च लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इसे हर परिवार में बचपन से प्रचारित व प्रसारित करना चाहिए। ये जरूरी है कि महिलाएँ शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत हो। चूकि एक बेहतर शिक्षा की शुरूआत बचपन से घर पर हो सकती है महिलाओ के उत्थान के लिए एक स्वस्थ परिवार की जरूरत है जो राष्ट्र के सर्वागिण विकास के लिए आवश्यक है। आज भी कई पिछड़े क्षेत्रो में माता पिता की अशिक्षा , असुरक्षा और गरीबी की वजह से कम उम्र में विवाह और बच्चे पैदा करने का चलन है। महिलाओ को मजबूत बनाने के लिए महिलाओ के खिलाफ होने वाले दुर्व्यवहार लैगिक भेदभाव, सामाजिक अलगाव तथा हिंसा आदि को रोकने के लिए सरकार कई सारे कदम उठा रही है। महिलाओ को समस्या का उचित समाधान करने के लिए महिला आरक्षण बिल 108 वाँ संविधान संशोधन का पास होना बहुत जरूरी है ये संसद में महिलाओ की 33% हिस्सेदारी को सुनिश्चित करता है। दूसरे क्षेत्रो में भी महिलाओ को सक्रिय रूप से भागीदार बनाने के लिए कुछ प्रतिशत सीटो को आरक्षित किया गया है। साक्षर महिलाओ को वास्तविक विकास के लिए पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रो मे जाना होगा और वहा की महिलाओ को सरकार की तरफ से मिलने वालीसुविधाओ और उनके अधिकारो से अवगत कराना होगा जिससे उनका भविष्य बेहतर हो सके। महिला सशक्तिकरण के सपने को सच करने के लिए लड़कियो के महत्व और उनकी शिक्षा में प्रचारित करने की जरूरत है।

15 अगस्त 2022 को आजादी के 72 साल पूरे हो गये। इसी दिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा अलाहाबाद के साबरमती आश्रम में 12 मार्च को आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इसी दिन महात्मा गांधी जी ने नमक सत्याग्रह की शुरूआत की थी। इस महोत्सव को मनाने की तीन प्रमुख वजह हैः- पहला यह कि इसी दिन हमारा देश अंग्रेजो की गुलामी से आजाद हुआ था। दूसरा यह कि इस आजादी के दौरान कई वीर योद्धाओं ने अपने जान की बाजी लगा दी और अनन्य कष्ट सहे। उन्हे याद करने की जरूरत हैं। तीसरा यह की हमारे देश को आजाद हुए 75 साल हो चुके है। इन कारणो से आजादी के अमृत महोत्सव के माध्यम से स्वतंत्रता और लोकतंत्र के मायने बताने बहुत जरूरी है कि इन 75 वर्षों मे भारत ने क्या उपलब्धिया हासिल की है। वर्तमान समय में जो युवा पीढ़ी है जिनकी उम्र 18 से 35 साल के बीच मे है वह आजादी के संघर्ष और लोकतंत्र के महत्व को बेहतर ढंग से नही जानती है। कई विचारधाराओं मे बटी यह पीढ़ी गुमराही के एक चौराहे पर खड़ी है। ऐसे में उसे अपने देश के इतिहास और वर्तमान से जोड़ना बहुत जरूरी है। कहते है कि जो देश अपना इतिहास भूल जाता है उसका भूगोल बदल जाता है और हुआ भी यही है। कई कुर्बानिया व्यर्थ चली गई तब जबकी देश का विभाजन हुआ। भारत को आजाद कराने के लिए किन-किन चुनौतियो का सामना करना पड़ा और क्या क्या कुर्बानिया भारत को देनी पड़ी यह आज की युवा पीढ़ी को जानना जरूरी है। साथ ही यह भी की आने वाले समय में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा । हांलांकि किताबों और स्कूलों में पढ़ाए गए पाठ से उन्हे आजादी मिल जाती है लेकिन वह करीब से इसकी संघर्ष की कहानी को नही जानते है। इतिहास को बहुत सी बातें पाठ्यक्रम में नही, जिन्हे जानना या बताना जरूरी है। भारत को विश्वअर्थव्यवस्था में एक शक्ति माना गया है। भारत में युवाओं की संख्या बहुत अधिक है जो अपनी काबिलियत से लगातार उन्नति और सफलता के परचम लहरा रही है और देश के विकास में सहयोग कर रही , लेकिन भारत ने एक बुरी अर्थव्यवस्था का दौर भी देखा है जब आजादी के बाद भारत को बंटवारा झेलना पड़ा और भारत चीन के साथ युद्ध हुआ। उस समय के बाद भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से टूट चुकी थी लेकिन फिर भी लगातार प्रयास के बाद भारत आज एक बड़ी अर्थव्यवस्था और हर क्षेत्र मे विकास वाला देश बन गया है। आज भारत एक परमाणु शक्ति होने के साथ ही बड़ी सैन्य शक्ति भी है । यही नही चांद और मंगल पर मानव रहित मिशन भेजने वाले देशो की सूची मे भारत का भी नाम शामिल है जो कि हर भारतवासी के लिए गर्व की बात है। साथ ही भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने बहुत ही कम खर्च में मंगल मिशन के लिए पहली ही बार में सफलता प्राप्त की है। बात की जाए उत्पादन के क्षेत्र की तो इस मामले मे भी भारत ने कई देशो को पीछे छोड़ा है। सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ भारत सरकार लगातार अपनी योजनाओ के माध्यम से लोगो तक सेवाए पहुचाती रहती है। इससे वर्तमान में भारत की तस्वीर बदल गई है। आज भारत को दुनिया सम्मान और आशा भरी नज़रो से देख रही है। इन सभी बातो पर ध्यान देना आवश्यक है क्योकि जब आप इन सभी बातो पर ध्यान देंगें तो आपको गर्व महसूस होगा कि आप भारतवासी है। और आप भारत जैसे देश में पैदा हुए है, इसलिए आजादी का अमृत महोत्सव मनाना बहुत ज़रूरी है। महिला सशक्तिकरण के सपने को सच करने के लिए लड़कियो के महत्व और उनकी शिक्षा में प्रचारित करने की जरूरत है।